भारतीय रेलवे Vande Bharat ट्रेनों के मेंटेनेंस, ट्रैक अपग्रेड और स्टेशन रिडेवलपमेंट पर करीब ₹14,000 करोड़ खर्च करने की तैयारी में है। इस बड़े कैपेक्स का सीधा फायदा रेलवे इंफ्रा और कोच बनाने वाली कुछ चुनिंदा कंपनियों को मिलने की उम्मीद मानी जा रही है।
निवेश की डिटेल और फोकस एरिया
नया निवेश मुख्य तौर पर Vande Bharat ट्रेनों के लिए मॉडर्न मेंटेनेंस डिपो, हाई-स्पीड ट्रैक क्वालिटी, सिग्नलिंग सिस्टम और व्यस्त रूट के स्टेशनों के री–डेवलपमेंट पर किया जाएगा। इससे सेमी हाई–स्पीड ट्रेनों की समयपालन क्षमता, सेफ्टी और पैसेंजर कंफर्ट बेहतर होने का लक्ष्य है
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IRCON International पर असर
IRCON International रेलवे और हाईवे दोनों से जुड़े EPC प्रोजेक्ट्स में काम करती है और इसका बड़ा हिस्सा ऑर्डर बुक में रेलवे प्रोजेक्ट्स का है। सितंबर 2025 तक IRCON का ऑर्डर बुक लगभग ₹23,865 करोड़ था, जिसमें करीब 75% हिस्सा रेलवे सेगमेंट का है, जो दिखाता है कि नए वंदे भारत और ट्रैक अपग्रेड प्रोजेक्ट्स से इसे मजबूत पाइपलाइन मिल सकती है
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Texmaco Rail की ऑर्डर बुक
Texmaco Rail & Engineering वैगन, कोच और रेल EPC प्रोजेक्ट्स में एक्टिव है और ट्रैक, ब्रिज व इलेक्ट्रिफिकेशन जैसे काम भी करती है। सितंबर 2025 तक कंपनी की ऑर्डर बुक लगभग ₹6,367 करोड़ थी, जिस पर वंदे भारत और माल गाड़ियों से जुड़े नए ऑर्डर्स जुड़ने की संभावना मानी जा रही है।
Titagarh Rail Systems के लिए अवसर
Titagarh Rail Systems पैसेंजर कोच, मेट्रो और वंदे भारत जैसी सेमी हाई–स्पीड ट्रेनों के कोच बनाती है। बजट 2025 में वंदे भारत ट्रेनों के लिए लगभग ₹57,690 करोड़ की बड़ी अलोकेशन के बाद कंपनी की ऑर्डर बुक में वंदे भारत से जुड़ा हिस्सा मार्च 2025 तक लगभग 62% तक पहुंच गया, जिससे मल्टी–ईयर ग्रोथ विजिबिलिटी बनती है।
RVNL की मजबूत प्रोजेक्ट पाइपलाइन
Rail Vikas Nigam Limited नई लाइन, डबलिंग, इलेक्ट्रिफिकेशन और स्टेशन रिडेवलपमेंट जैसे कोर रेलवे इंफ्रा प्रोजेक्ट्स संभालती है। सितंबर 2025 तक RVNL की कुल ऑर्डर बुक करीब ₹90,000 करोड़ बताई गई है, जिसमें वंदे भारत कॉरिडोर, अमृत भारत स्टेशन योजना और अन्य मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट्स से जुड़े कई काम शामिल हैं
रेलवे सेक्टर में लंबी अवधि की थीम
केंद्र सरकार ने बजट 2025–26 में भारतीय रेलवे के लिए कुल पूंजीगत व्यय को 2.4 लाख करोड़ रुपये से ऊपर के स्तर पर बनाए रखा है, जिससे अगले कई साल तक रेलवे इंफ्रा में तेज निवेश जारी रहने की उम्मीद है। वंदे भारत जैसे प्रोजेक्ट्स पर फोकस से कोच मैन्युफैक्चरिंग, वैगन, सिग्नलिंग और EPC कंपनियों के लिए लंबी अवधि की डिमांड क्रिएट होती दिख रही है।
Disclaimer : शेयर बाजार में निवेश जोखिम के साथ होता है, इसलिए निवेश से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें। हम जानकारी की पूर्णता या सटीकता की गारंटी नहीं देते।






