सालभर से भी कम समय में 3500% रिटर्न देने के बाद भी नहीं थमा Defence Stock, फिर लगा अपर सर्किट, Revenue में 2900% की ऐतिहासिक छलांग

साल की शुरुआत में 0.90 रुपये पर कारोबार करने वाली Swan Defence शेयर अब 1,388 रुपये पर अपर सर्किट में है, यानी 1,54,000% का रिटर्न। पिछली 6 महीने में Defence Stock 1 रुपये से 1,388 रुपये तक पहुंचा। कंपनी का मार्केट कैप अब 7,300 करोड़ रुपये है। Q2 में रेवेन्यू 2,900% बढ़ा है। लेकिन कंपनी अभी भी घाटे में है।

Swan Defence: कहानी और हकीकत का अंतर

Swan Defence and Heavy Industries Ltd., जिसे पहले Reliance Naval कहा जाता था, भारत के सबसे बड़े शिपयार्ड्स में से एक है। इसका शिपयार्ड गुजरात के Pipavav में है और भारत की लगभग 30% जहाज निर्माण क्षमता यहीं रहती है। कंपनी सिर्फ नए जहाज नहीं बनाती, बल्कि Defence जहाजों, नौसेना और कोस्ट गार्ड के जहाजों की मरम्मत, हेवी फैब्रिकेशन और समुद्री प्रोजेक्ट्स भी करती है। जमीनी संपत्ति और बुनियादी ढांचा हमेशा से इसकी ताकत रहा है, लेकिन आर्थिक हालत कमजोर थी।

सरकारी खबरें और बाजार का भरोसा

अगस्त 2025 में Swan Defence ने एक अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कंपनी के साथ समझौता किया। सितंबर में गुजरात Maritime Board के साथ 4,250 करोड़ रुपये का बड़ा समझौता आया, जिसमें शिपयार्ड का विस्तार, उत्कृष्टता केंद्र और समुद्री समूह के प्लान शामिल हैं। नवंबर में यूरोप की शिपिंग कंपनी से 6 रासायनिक टैंकर के ऑर्डर का इरादा मिला। साथ ही 750 करोड़ रुपये जुटाने के लिए पूंजी निवेश योजना की भी घोषणा की गई। ये खबरें दिखाती हैं कि कंपनी अतीत की समस्याओं से आगे निकलने की तैयारी कर रही है।

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तेजी से भाव में उड़ान और वर्तमान स्थिति

साल 2025 की शुरुआत में जहां Defence Stock महज 0.90 रुपये पर था, वहीं दिसंबर के अंत तक 1,388 रुपये पर पहुंच गया। 29 दिसंबर को शेयर ने खुद ही 1,388 रुपये पर अपर सर्किट लॉक किया, जो इसका सर्वकालीन ऊंचाई है। कंपनी का बाजार मूल्य अब 7,300 करोड़ रुपये के करीब है। जनवरी में जहां शेयर 35 रुपये था, अब 3,500% से ज्यादा का रिटर्न दिया है। बाजार ने कुछ ही महीनों में कंपनी की कीमत पूरी तरह दोबारा लिख दी है।

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वास्तविक वित्तीय हालत और जोखिम

FY26 की पहली छमाही में कंपनी का रेवेन्यू 63 करोड़ रुपये था लेकिन 50 करोड़ से अधिक का घाटा भी हुआ। Q2 में रेवेन्यू 2,934% बढ़कर 39–44 करोड़ हुआ लेकिन शुद्ध घाटा 19.86 करोड़ रहा। ऑपरेटिंग कैश फ्लो निगेटिव है और कर्ज करीब 2,540 करोड़ रुपये का है। पिछले साल का घाटा 1,600 करोड़ रुपये से अधिक था। यानी जहां शेयर की कीमत आसमान छू गई, वहीं असली बिजनेस में अभी सुधार की गति बहुत धीमी है। उच्च कर्ज, चल रहे घाटे और नकद की कमी जैसे जोखिम अभी बरकरार हैं।

Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश, ट्रेडिंग या चिकित्सा सलाह नहीं माना जाए। शेयर बाज़ार में निवेश जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए फैसला लेने से पहले अपने रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइज़र से परामर्श अवश्य करें।​