भारतीय सेना 850 कामिकेज Drone खरीदने की तैयारी कर रही है। ये Drone तीनों सेनाओं और स्पेशल फोर्स को दिए जाएंगे। दिसंबर के आखिरी सप्ताह में इसे मंजूरी मिलने की संभावना है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना को इन ड्रोनों की जरूरत महसूस हुई। आने वाले दिनों में सेना 30 हजार ड्रोन खरीदना चाहती है।
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Drone की जरूरत और ऑपरेशन सिंदूर
भारतीय सेना को कामिकेज ड्रोन की जरूरत बढ़ गई है। ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने इन ड्रोनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में 7 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। ड्रोनों का इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना के खिलाफ भी किया गया। इस ऑपरेशन से सेना को Drone के महत्व का अहसास हुआ।
भारतीय कंपनियों को मिलने वाले अवसर
भारत को स्वदेशी Drone बनाने की क्षमता विकसित करनी होगी। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड BEL, Bharat Dynamics Limited, HAL, Paras Defence, Zen Technologies, ideaForge, Garuda Aerospace, and Asteria Aerospace जैसी रक्षा कंपनियों को ये ड्रोन बनाने का अवसर मिल सकता है। ये कंपनियां पहले से ड्रोन और सैन्य उपकरण बनाती हैं। स्वदेशी विकास से सेना को अच्छे ड्रोन मिलेंगे और कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिलेंगे।
सेक्टर की संभावनाएं और सरकारी योजना
भारत सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता चाहती है। Drone जैसी आधुनिक तकनीक से भारत की सुरक्षा शक्ति बढ़ेगी। सेना को 850 ड्रोन मिलने के बाद भविष्य में 30 हजार ड्रोन खरीदने की योजना है। इससे भारतीय कंपनियों को लंबी अवधि तक काम मिलेगा। ड्रोन बनाने वाली कंपनियों का राजस्व और मुनाफा काफी बढ़ेगा।
शेयर बाजार पर असर और निवेशकों के लिए संकेत
रक्षा कंपनियों के शेयरों में इस खबर का सकारात्मक असर हो सकता है। Bharat Electronics Limited (BEL), Bharat Dynamics Limited, HAL, Paras Defence, Zen Technologies, ideaForge, Garuda Aerospace, and Asteria Aerospace और अन्य Drone कंपनियों को मिल सकते हैं। इससे इन कंपनियों की आमदनी और मुनाफा बढ़ेगा। निवेशकों के लिए रक्षा सेक्टर के शेयर लंबी अवधि में अच्छा मौका देते हैं क्योंकि सरकार रक्षा बजट लगातार बढ़ा रही है।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश, ट्रेडिंग या चिकित्सा सलाह नहीं माना जाए। शेयर बाज़ार में निवेश जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए फैसला लेने से पहले अपने रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइज़र से परामर्श अवश्य करें।






