भारत–अमेरिका ट्रेड डील फाइनल होते ही FII बिकवाली के थमने, रुपये में स्थिरता और 2026 में भारतीय शेयर बाजार में नई तेजी की संभावना मजबूत मानी जा रही है। हाल के डेटा दिखाते हैं कि FII फ्लो, सेक्टोरल रोटेशन और ग्लोबल ट्रेंड मिलकर आईटी, मेटल और फाइनेंशियल शेयरों के लिए बेहतर माहौल बना रहे हैं।
FII फ्लो
नवंबर–दिसंबर 2025 में FII ने लगातार बिकवाली के बाद चुनिंदा सेक्टरों में दोबारा खरीदारी बढ़ानी शुरू की, खासकर फाइनेंशियल और बड़े इंडेक्स स्टॉक्स में। एनएसई के ताजा आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 के मध्य तक FII अब भी नेट सेलर हैं, लेकिन बिक्री का दबाव पहले की तुलना में कम हुआ है और कई सेशन्स में नेट बायिंग भी दिखी है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ग्लोबल अनिश्चितता नहीं बढ़ी तो 2026 तक FII फ्लो धीरे–धीरे पॉजिटिव हो सकते हैं, जिससे निफ्टी और सेंसेक्स में नई हाई की संभावना बनती है।
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भारत–अमेरिका ट्रेड डील से कौन से सेक्टर लाभ में
भारत–अमेरिका ट्रेड डील से तकनीक, रक्षा, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा और एग्री–फूड से जुड़े सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचने की संभावना मानी जा रही है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 की ट्रेड डील में टैरिफ में राहत और मार्केट एक्सेस बढ़ने से हाई–टेक मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस इक्विपमेंट, मेडिकल डिवाइस, एनर्जी और डिजिटल सर्विसेज की भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में बड़ा अवसर खुल सकता है। इससे इन सेक्टरों की एक्सपोर्ट ग्रोथ तेज होने और मिड–टर्म में रेवेन्यू व प्रॉफिट मार्जिन सुधरने की उम्मीद की जा रही है।
आईटी, मेटल और फाइनेंशियल शेयरों की संभावना
एक्सपर्ट्स के अनुसार 2026 तक आईटी सेक्टर के वैल्यूएशन आकर्षक स्तर पर हैं और खासकर वे कंपनियां, जिनकी डॉलर में आमदनी ज्यादा है, ट्रेड डील और अमेरिकी रिकवरी दोनों का लाभ उठा सकती हैं। मेटल सेक्टर में कॉपर, स्टील और एलुमिनियम की मांग मेक–इन–इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, ईवी और इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेक्स से सपोर्ट होने की उम्मीद है, इसलिए अच्छे बैलेंस शीट वाली कंपनियों में आगे भी अपसाइड की गुंजाइश बताई जा रही है। फाइनेंशियल सेक्टर में एफडीआई नियमों में ढील, क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी में सुधार की वजह से प्राइवेट व पीएसयू बैंक, एनबीएफसी और बीमा कंपनियों में भी 2026 तक बेहतर रिटर्न की संभावना पर जोर दिया जा रहा है।
2026 के लिए समग्र मार्केट आउटलुक
कई ब्रोकरेज हाउस और फंड मैनेजर 2026 के लिए भारतीय इक्विटी मार्केट पर पॉजिटिव बायस रखते हैं, हालांकि वे यह शर्त भी जोड़ते हैं कि मजबूत अपसाइड के लिए एफआईआई फ्लो की वापसी जरूरी होगी। रिपोर्ट्स में अनुमान है कि यदि ट्रेड डील से जुड़ी अनिश्चितता खत्म होती है और ग्लोबल इकोनॉमी हार्ड लैंडिंग से बच जाती है, तो कॉर्पोरेट अर्निंग्स 2026 में दो अंकों की दर से बढ़ सकती हैं, खासकर आईटी, बैंकिंग, कंजम्पशन और कैपेक्स–लिंक्ड सेक्टर्स में। कई अंतरराष्ट्रीय संस्थान यह भी आकलन कर रहे हैं कि अगले एक–दो साल में वैल्यूएशन और ग्रोथ के आधार पर भारतीय बाजार कई पैमानों पर अमेरिकी मार्केट के मुकाबले ज्यादा आकर्षक दिख सकता है।
Disclaimer : शेयर बाजार में निवेश जोखिम के साथ होता है, इसलिए निवेश से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें। हम जानकारी की पूर्णता या सटीकता की गारंटी नहीं देते






