Indigo पर DGCA का कड़ा एक्शन, स्टॉक में भारी गिरावट, ब्रोकरेज ने बताया अब क्या करें निवेशक

IndiGo पर हाल में DGCA की सख्ती के बाद दबाव बढ़ गया है। सरकार के नए Flight Duty Time Limit (FDTL) नियमों से कंपनी की लागत बढ़ने की आशंका है। Citi ने स्टॉक पर Buy call बरकरार रखी है लेकिन टारगेट प्राइस ₹6500 से घटाकर ₹5800 कर दिया है, दबाव के बावजूद लंबे समय में सुधार संभव है।

DGCA के नियमों का असर

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo पर DGCA की कार्रवाई से शॉर्ट-टर्म दबाव दिख रहा है। सरकार ने नए FDTL नियम लागू किए हैं जिससे पायलट के विश्राम के समय को कड़ा किया गया है। IndiGo इन्हें समय पर लागू नहीं कर पाई, जिसके कारण कई फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं। DGCA ने कंपनी को रोज़ की उड़ानों में लगभग 10% कमी करने का आदेश दिया है। इससे IndiGo का मार्केट शेयर 65% से घटकर करीब 55% तक आने की संभावना है। हालांकि कंपनी ने कहा है कि संचालन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।

लागत और संचालन पर प्रभाव

नए नियमों की वजह से पायलटों की संख्या बढ़ाने और नई हायरिंग की ज़रूरत होगी, जिससे खर्च बढ़ेगा। साथ ही डॉलर की मज़बूती से जेट फ्यूल, मेंटेनेंस और लीज़िंग की लागत भी बढ़ने की उम्मीद है। Citi ने अपनी रिपोर्ट में EBITDAR अनुमान घटाया है, यानी मुनाफ़े का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि IndiGo धीरे-धीरे अपने नेटवर्क को स्थिर कर रही है। मंगलवार को उसने 1800 से ज़्यादा फ्लाइट ऑपरेट कीं और बुधवार तक यह 1900 के करीब पहुंचने की उम्मीद है, जिससे सामान्य स्थिति लौटने के संकेत हैं।

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कंपनी की स्थिति और रणनीति

IndiGo भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन है और उसके पास घरेलू उड्डयन बाज़ार में लंबी बढ़त है। DGCA की सख्ती के बावजूद कंपनी ने यात्रियों और रूट्स को बनाए रखने की कोशिश की है। सभी 138 स्टेशन फिर से कनेक्ट हो चुके हैं। कंपनी का कहना है कि उसकी प्राथमिकता सुरक्षित और समय पर उड़ानें शुरू करना है। बढ़ते खर्च के बावजूद IndiGo अपनी संचालन क्षमता में सुधार के प्रयास कर रही है ताकि लंबी अवधि में भरोसेमंद सेवाएं जारी रख सके।

निवेशकों के लिए संकेत

Citi ने InterGlobe Aviation Ltd (IndiGo की मूल कंपनी) पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है लेकिन टारगेट प्राइस ₹6500 से घटाकर ₹5800 किया है। इसका मतलब है कि मौजूदा भाव ₹4850 के आसपास होने पर अब भी सीमित अपसाइड बचा है। शॉर्ट-टर्म में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है, लेकिन लॉन्ग-टर्म निवेशक होल्ड रख सकते हैं। सरकार के रूल्स स्पष्ट हैं और आने वाले महीनों में जब उड़ानें फिर सामान्य होंगी, तब नतीजे स्थिर होने की उम्मीद है।

Disclaimer : शेयर बाजार में निवेश जोखिम के साथ होता है, इसलिए निवेश से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें। हम जानकारी की पूर्णता या सटीकता की गारंटी नहीं देते।