भारत सरकार चीनी कंपनियों पर लगी पांच साल पुरानी पाबंदियों को हटाने की सोच रही है। इससे Power और रेलवे सेक्टर की भारतीय कंपनियों को झटका लगा है। BHEL का शेयर 10 प्रतिशत गिरा, जबकि L&T, सीमेंस और अन्य कंपनियों के शेयर में भी 3-4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। आइए समझते हैं कि यह क्या मामला है।
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सरकार की चीनी कंपनियों के लिए राहत की योजना
भारत के वित्त मंत्रालय चीनी कंपनियों पर लगी पाबंदियों को खत्म करने की सोच रहा है। ये पाबंदियां 2020 से लागू थीं, जब दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीमा पर झड़पें हुई थीं। उस समय सरकार ने चीनी कंपनियों को सरकारी प्रोजेक्ट्स में बोली लगाने से रोक दिया था। अब सरकार चीन के साथ सुधरते डिप्लोमैटिक संबंधों और सीमा पर घटाते तनाव को देखते हुए इन प्रतिबंधों को हटाना चाहती है। इससे भारतीय Power और इंजीनियरिंग कंपनियों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
BHEL को सबसे बड़ा झटका
Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) को इस खबर से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। BHEL के शेयर 8 जनवरी को 10 प्रतिशत तक गिरकर लोअर सर्किट लिमिट पर पहुंच गए। BHEL पूरे भारत में बिजली घरों के लिए उपकरण बनाता है और उन्हें सरकारी कंपनियों जैसे NTPC को सप्लाई करता है। यह बड़े Power प्रोजेक्ट्स के टर्बाइन, जनरेटर और बॉयलर बनाता है। अगर चीनी कंपनियों को ये परियोजनाएं मिलने लगें, तो BHEL के ऑर्डर कम हो सकते हैं और इसकी आय में गिरावट आ सकती है।
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अन्य बड़ी कंपनियों पर भी असर
सीमेंस का शेयर 4 प्रतिशत से ज्यादा गिरा, क्योंकि चीन की CRRC कंपनी रेलवे सेक्टर में इसका प्रतिद्वंद्वी है। अगर CRRC को भारतीय रेलवे प्रोजेक्ट्स में बोली लगाने की अनुमति मिल जाती है, तो सीमेंस और अन्य भारतीय कंपनियों को नुकसान हो सकता है। L&T जैसी बड़ी इंजीनियरिंग कंपनी का भी 3 प्रतिशत शेयर गिरा। Hitachi Energy और ABB India जैसी कंपनियों के शेयर में भी 4 से 4.5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
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पिछली पाबंदियों का असर और भविष्य की चिंताएं
ये पाबंदियां लागू किए जाने के बाद काफी असरदार साबित हुई थीं। चीन की CRRC कंपनी को 216 मिलियन डॉलर के ट्रेन बनाने का कॉन्ट्रैक्ट पाने से रोक दिया गया था। चीनी कंपनियों को भारतीय सरकारी समिति के साथ रजिस्टर करना और राजनीतिक व सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया था। इससे भारतीय कंपनियों को सरकारी प्रोजेक्ट्स में काफी फायदा हुआ। अगर ये पाबंदियां हट गईं, तो चीनी कंपनियां कीमत में कटौती करके भारतीय कंपनियों का बहुत सारा काम छीन सकती हैं।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश, ट्रेडिंग या चिकित्सा सलाह नहीं माना जाए। शेयर बाज़ार में निवेश जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए फैसला लेने से पहले अपने रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइज़र से परामर्श अवश्य करें।






