मोदी सरकार Railway सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा 1.30 लाख करोड़ रुपये का बजट लाने की तैयारी कर रही है। इसका मकसद रेल हादसों को रोकना और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना है। इस फैसले से रेलवे के सिग्नल, पटरी और कवच सिस्टम बनाने वाली कंपनियों को बहुत बड़ा फायदा होने वाला है।
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सुरक्षा बजट और Railway का नया प्लान
सरकार ने तय किया है कि ट्रेनों को सुरक्षित बनाने के लिए पैसे की कमी नहीं होने दी जाएगी। खबर है कि साल 2027 के लिए सरकार सुरक्षा कार्यों पर 1.3 लाख करोड़ रुपये खर्च कर सकती है। यह पिछले बजट से करीब 12% ज्यादा होगा। इसका सबसे ज्यादा पैसा पुराने ट्रैक को बदलने, डिब्बों की मरम्मत करने और नई तकनीक लाने में लगेगा। सरकार चाहती है कि ट्रेन एक्सीडेंट पूरी तरह बंद हों। Railway के कुल खर्च का लगभग आधा हिस्सा अब सिर्फ सुरक्षा इंतजामों पर ही खर्च किया जाएगा। यह फैसला पूरे रेलवे सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ा मौका लेकर आया है।
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कवच सिस्टम और संबंधित कंपनियां
इस बजट का एक बड़ा हिस्सा ‘Kavach’ सिस्टम को लगाने में खर्च होगा। कवच एक ऐसी स्वदेशी तकनीक है जो दो ट्रेनों को आपस में टकराने से रोकती है। अगर लोको पायलट गलती से ब्रेक न लगाए, तो यह सिस्टम अपने आप ब्रेक लगा देता है। अभी यह सिस्टम बहुत कम रूट पर लगा है, लेकिन अब सरकार इसे 15,000 किलोमीटर से ज्यादा रूट पर लगाने जा रही है। इस तकनीक को बनाने और लगाने का काम मुख्य रूप से HBL Power और Kernex Microsystems जैसी कंपनियों के पास है। जैसे-जैसे कवच का काम पूरे देश में बढ़ेगा, इन कंपनियों का बिजनेस मॉडल और मुनाफा दोनों तेजी से मजबूत होंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को मिलेंगे बड़े ऑर्डर
सुरक्षा सिर्फ सिग्नल से नहीं, बल्कि मजबूत पटरियों से भी आती है। इसलिए सरकार ट्रैक रिन्यूअल यानी पुरानी पटरियों को बदलकर नई पटरियां बिछाने पर 22,800 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करेगी। इसका सीधा फायदा RVNL और IRCON International Ltd जैसी सरकारी Railway कंपनियों को होगा, जो पटरियां बिछाने और इंफ्रास्ट्रक्चर का काम करती हैं। जब सरकार इतना बड़ा काम देती है, तो इन कंपनियों के ऑर्डर बुक में भारी उछाल आता है। इसके अलावा, पुलों की मरम्मत और सुरक्षा दीवारों का काम भी इन्हीं कंपनियों के जरिए पूरा किया जाएगा, जिससे इनकी कमाई आने वाले सालों में बढ़ने की उम्मीद है।
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फाइनेंस और वैगन कंपनियों का भविष्य
जब रेलवे इतना सारा पैसा खर्च करेगा, तो उसे फंड की जरूरत पड़ेगी। यहाँ भूमिका आती है IRFC की, जो रेलवे प्रोजेक्ट्स के लिए पैसा मुहैया कराती है। ज्यादा प्रोजेक्ट्स का मतलब है IRFC का ज्यादा बिजनेस। वहीं, सुरक्षित और आधुनिक डिब्बे बनाने के लिए Titagarh Rail Systems और Jupiter Wagons जैसी कंपनियों को नए ऑर्डर मिलेंगे। रोलिंग स्टॉक यानी इंजन और डिब्बों के रखरखाव पर करीब 58,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। शेयर बाजार में इन सभी कंपनियों के शेयर इस खबर के बाद फोकस में आ सकते हैं, क्योंकि सरकारी खर्च बढ़ने से इनकी आर्थिक स्थिति और भी मजबूत हो जाएगी।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश, ट्रेडिंग या चिकित्सा सलाह नहीं माना जाए। शेयर बाज़ार में निवेश जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए फैसला लेने से पहले अपने रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइज़र से परामर्श अवश्य करें।






